जादुई ग्रंथ

आर्स पौलीना देवदूतों को ग्रह-होरा और राशिचक्र के अंशों में बाँटती है। उसका नाम अलग लैटिन पौलीन आर्ट का अंतर छिपा देता है।

एक पुस्तक में दो व्यवस्थाएँ

आर्स पौलीना लेमेगेटन में तीसरे स्थान पर है, लेकिन ग्रहों के देवदूतों की एक छोटी तालिका भर नहीं है। उसका पहला भाग दिन के बारह और रात के बारह होरा के अनुसार व्यक्तित्व रखता है; दूसरा राशिचक्र के एक-एक अंश को देवदूत देता है। ये अलग व्यवस्था-सिद्धांत हैं। पहले में शासक होरा चौबीस भागों के चक्र में अपनी जगह रखता है, जबकि उसका ग्रहीय पद सप्ताह के दिन के साथ बदलता है। दूसरे में जन्मकुंडली का अंश “मनुष्यों के देवदूत” और एक तत्त्व-क्षेत्र की ओर संकेत करता है। पीटरसन की प्रतिलिपि British Library की Sloane MS 3825 को पांडुलिपि-आधार बताती और दोनों भागों को अलग स्रोत-समूहों से जोड़ती है। इसलिए पुस्तक एक सूची दो बार दोहराने के बजाय उपयुक्त समय चुनने वाली घड़ी को जन्मकालीन मानचित्र से जोड़ती है। केवल होरा-अधिपति गिनाने वाला लेख राशिचक्र का भाग छोड़ता है; होरा-व्यवस्था समझाए बिना 360 अंशों के नाम देने वाला लेख उलटी दिशा से वही गलती करता है।

ठोस उदाहरण: 1641 की मुहर किसका सूचक है

पहला भाग बार-बार 10 मार्च 1641 का उदाहरण देता है और वही तारीख पाठ की कार्य-व्यवस्था खोलती है। पाठक सूर्योदय से गिने होरा से शुरू करता है, उसके नियुक्त देवदूत को पहचानता और फिर सप्ताह के दिन के अनुसार संबंधित ग्रहीय पद बदलता है। मुहर किसी सत्ता का कालातीत हस्ताक्षर नहीं है: उसमें लग्नेश, ग्रहों के चिह्न और चुने क्षण के बारहवें भाव में उदित राशि आते हैं। फिर उसे बड़ी तालिका के संबंधित भाग पर रखा जाता है और सामान्य आह्वान में उचित नाम भरे जाते हैं। उदाहरण बुधवार से मंगलवार पर ले जाएँ तो पहले होरा का देवदूत रह सकता है, जबकि ग्रहीय संबंध बदलता है; दूसरे होरा पर जाएँ तो देवदूत, अधीनस्थों की सूची और मुहर की रचना भी बदलती है। इस तरह आरेख पाठ के भीतर बनाया समय-सूचक है। चौबीस स्थिर “पौलीन मुहरों” का आधुनिक समूह पांडुलिपि के उदाहरणों का रूप बचाकर भी वह गणना छिपा सकता है जिसे उदाहरण सिखाते थे।

पाठ के भीतर छिपी तारीखें

शीर्षक प्रेरित से जुड़ा लगता है, लेकिन Lemegeton का अंग्रेज़ी पाठ बार-बार 1641 और यहाँ तक कि बंदूकों का उल्लेख करता है। ये संकेत इस खास रचना को पहली शताब्दी के प्रेरित पौलुस की मानने के विरुद्ध हैं। उसका पहला भाग ट्रिथेमियस की Steganographia की दूसरी पुस्तक से निकट संबंध रखता है। पीटरसन सामग्री के कुछ हिस्सों के पीछे सत्रहवीं शताब्दी के मुद्रित स्रोत भी बताते हैं। दूसरी ओर Pauline Art नाम का पुराना लैटिन पाठ अलग कृति है: एक नाम होने से वह इस अंग्रेज़ी पुस्तक का सीधा लैटिन मूल नहीं बन जाता। इसलिए Ars Paulina शीर्षक अलग पाठ-परिवारों को समेटता है, एक अंग्रेज़ी पुस्तक और उसके सीधे लैटिन मूल को नहीं। सत्रहवीं शताब्दी का संकलन प्राचीन लेखकत्व की सरल कथा के बजाय उधार और रूपांतरण की जाँच का अवसर देता है।

आरेखों और तालिकाओं के पाठांतर

पाठ, पांडुलिपि के चित्र, संपादकीय पुनर्निर्माण और बाद के डिजिटल चित्र आरेखों के अलग रूप बचाते हैं। व्यवस्थित राशिचक्र दिशा खोजने में उपयोगी है, लेकिन पांडुलिपियों में न होने वाली एकरूपता का आभास दे सकता है। किसी नाम का स्रोत पूरी तालिका के इतिहास से अधिक स्पष्ट हो सकता है; दोनों के प्रसारण-पथ अलग हो सकते हैं। संस्करण का परिचय अंशों के देवदूतों का दूसरा स्रोत मुद्रित सामुद्रिक और हस्तरेखा-सामग्री में बताता है। इससे दिखता है कि दूसरे भाग का निकट पूर्ववर्ती पहले से अलग हो सकता है। आरेख दिखाते हैं कि पूर्व-आधुनिक लेखक आकाशीय श्रेणियाँ फिर कैसे उपयोग करते थे, लेकिन उनके नाम खगोलीय माप या किसी खास होरा में अलौकिक असर का प्रमाण नहीं हैं।

आगे समझने के प्रश्न

  • लेमेगेटन की अंग्रेज़ी पुस्तक दूसरे पौलीन आर्ट पाठों से कैसे अलग है?
  • आकृति होरा-शृंखला की है या राशिचक्र के अंशों की शृंखला की?
  • तारीख का संकेत देने वाले कौन-से शब्द संकलक का काल बताते हैं?

स्रोत और आगे पढ़ने की सामग्री

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