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सौर पुनरागमन गणक

चुने वर्ष में सूर्य अपने जन्मकालीन सायन देशांतर पर जिस UTC क्षण लौटता है, वह खोजें। उस क्षण का लग्न, मध्याकाश और भाव बनाने के लिए पुनरागमन-स्थान चुनें।
सौर पुनरागमन क्या है?
खगोलीय गणना खोजती है कि सूर्य का प्रत्यक्ष सायन क्रांतिवृत्तीय देशांतर जन्म-कुंडली की उसकी स्थिति से कब मिलता है। उस क्षण की ज्योतिषीय व्याख्या अलग परंपरा है और स्वयं गणना से निकली भविष्यवाणी नहीं है।
सौर पुनरागमन की विधि
क्षण कैसे खोजा जाता है
गणक स्थानीय जन्म-तिथि, समय और ऐतिहासिक UTC अंतर से जन्मकालीन सूर्य का देशांतर निकालता है। फिर चुने वर्ष में उस वर्षगाँठ के पास संख्यात्मक खोज करके पारगमन निकटतम मिनट तक पूर्णांकित करता है। परिणाम सूर्य की दोनों स्थितियाँ और उनका छोटा शेष अंतर दिखाता है।
पुनरागमन कुंडली में क्या है
गणना से मिले UTC क्षण पर यह पृष्ठ भूकेन्द्रीय सायन कुंडली-चक्र बनाता है और ग्रहों की स्थितियाँ सूचीबद्ध करता है। पुनरागमन-स्थान से लग्न, मध्याकाश और बारह भाव-संधियाँ मिलती हैं। पूर्ण-राशि, समभाव, पोर्फ़िरी, प्लासिडस, कैम्पानस या रेजियोमोंटेनस चुनें; जहाँ प्लासिडस, कैम्पानस या रेजियोमोंटेनस की भाव-संधियों की गणना नहीं हो सकती, वहाँ पृष्ठ पोर्फ़िरी का वैकल्पिक उपयोग स्पष्ट रूप से बताता है।
व्याख्या अलग है
पुनरागमन की गणना स्पष्ट परिभाषित स्थिति-मेल है। ज्योतिषीय परंपराएँ बनी कुंडली के अर्थ अलग समझती हैं; यह उपकरण उससे घटनाएँ नहीं निकालता। जन्म-समय और ऐतिहासिक UTC अंतर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे लक्ष्य के रूप में प्रयुक्त जन्मकालीन सूर्य का देशांतर तय करते हैं।
परिणाम को समझें
ये मार्गदर्शिकाएँ विधि समझाती हैं और बताती हैं कि परिणाम पढ़ते समय किन बातों की जाँच करनी चाहिए।
- ग्रहों की वापसी: सटीक तारीखें और वक्री गति में लक्ष्य-अंश पार करना
दुनिया भर के लिए एक ही जन्मकालीन देशांतर-मेल को उसकी पुनरागमन कुंडली के स्थान-निर्भर कोणों और भावों से अलग समझें।