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वैदिक ज्योतिष · नक्षत्र संदर्भ

नक्षत्र का समाप्ति-समय कैसे पढ़ें

एक सजावटी चाँदी का चंद्र-चक्र, बिना अंशांकन वाले पीतल के वलय और नील रंग की पुस्तक।

पंचांग चंद्रमा के वर्तमान क्षेत्र का नाम और उस अंतराल की समाप्ति का क्षण देता है।

दैनिक पंचांग नक्षत्र के नाम के पास समय दे सकता है। भारत के राष्ट्रीय पंचांग में वह सूचीबद्ध अंतराल का समाप्ति-क्षण है। तब चंद्रमा 13°20′ के सत्ताईस निरयण विभागों में अगले में प्रवेश करता है। समय को अंतराल की शुरुआत, सूर्योदय या दिखाई देने वाले तारे से मिलन का क्षण समझ लेना आसान है; प्रकाशन की व्याख्या इन धारणाओं को सही नहीं मानती।

पंक्ति को तीन हिस्सों में पढ़ें

नक्षत्र: पुष्य - समाप्ति 14:20 ISTइस उदाहरण की गणना में 14:20 IST के बाद अगला बराबर क्षेत्र, आश्लेषा, चलता है।

ऊपर की पंक्ति समझाने का उदाहरण है, नकल की गई या भविष्य के लिए निकाली दैनिक प्रविष्टि नहीं। उस उदाहरण की तिथि पर 09:00 IST में पुष्य अभी वर्तमान क्षेत्र होगा; 16:00 IST में आश्लेषा होगा। वास्तविक पंचांग चंद्रमा के भूकेन्द्रीय निरयण देशांतर से समाप्ति-समय निकालता है और अपनी समय-पद्धति बताता है। वास्तविक तिथि तिथि-विशिष्ट प्रकाशन या प्रलेखित सेटिंग वाले गणक में जाँचनी चाहिए।

नाम-क्रम महत्वपूर्ण है: आधिकारिक सूची में पुष्य आठवाँ और आश्लेषा नौवाँ है। सीमा पर पिछला अंतराल समाप्त और अगला शुरू होता है। पूर्णांकित समय परिवर्तन के पास सेकंड छिपा सकता है, इसलिए केवल मिनट तक छपे समाप्ति-समय से सटीक जन्म-स्थिति न निकालें।

IST घटना-समय और स्थानीय सूर्योदय अलग प्रश्नों के उत्तर हैं

स्थितीय खगोल विज्ञान केंद्र बताता है कि तिथि, नक्षत्र, योग और करण के समाप्ति-क्षण भूकेन्द्रीय हैं और भारतीय मानक समय में छपते हैं। छपे IST क्षण से पाँच घंटे तीस मिनट घटाने पर उसकी घोषित पद्धति में UT मिलता है। दुनिया भर की स्थानीय घड़ियों पर उसी क्षण के अलग लेबल हैं। विदेश में पाठक स्थानीय जन्म-समय से तुलना करने से पहले क्षण का रूपांतरण करें।

सूर्योदय की जानकारी का उद्देश्य अलग है। प्रकाशन स्वीकृत स्थानों का सूर्योदय-सूर्यास्त देता है और अहोरात्र समझाते समय एक सूर्योदय से अगले तक का अंतराल लेता है। नक्षत्र उस पूरे अंतराल में बना रहे और भीतर समाप्त न हो तो दैनिक पंक्ति अहोरात्र दिखा सकती है। संबंधित चंद्र-परिवर्तन फिर भी उस सूर्योदय-अवधि से बाहर किसी वास्तविक क्षण पर होता है।

कोणीय घटना

समाप्ति-क्षण

चंद्रमा अगले 13°20′ क्षेत्र की सीमा तक पहुँचता है। यह भूकेन्द्रीय क्षण है, जिसे समय-क्षेत्रों में बदला जा सकता है।

स्थानीय दिन का नाम

सूर्योदय से संबंध

कैलेंडर तय करता है कि कौन-सा स्थानीय दिन नाम दिखाएगा। सूर्योदय स्थान पर निर्भर है और भूकेन्द्रीय परिवर्तन के समान नहीं।

दो स्रोत अलग समय क्यों छाप सकते हैं

  1. वर्ष और सटीक तिथि जाँचें। दैनिक नाम दोहरता है, लेकिन चंद्रमा का परिवर्तन-क्षण एक निश्चित घड़ी-समय पर नहीं दोहरता।
  2. IST, UTC और देखने वाले का स्थानीय समय-क्षेत्र जाँचें। समयों को एक ही क्षण में बदले बिना घड़ी के अंक न मिलाएँ। कुछ पंचांग-पंक्तियाँ घंटे की गिनती 24 से आगे ले जाती हैं, ताकि घटना पिछले छपे दिन से जुड़ी रहे।
  3. निरयण मूलबिंदु जाँचें। राष्ट्रीय प्रकाशन नक्षत्र-गणना में परिवर्ती अयनांश बताता है; दूसरे मूलबिंदु वाला टूल परिवर्तन-समय खिसका सकता है।
  4. जाँचें कि समय समाप्ति का है या आरंभ का। आधिकारिक छपी पद्धति समाप्ति-समय देती है; वेब इंटरफ़ेस उसी सीमा को अगले क्षेत्र का आरंभ कह सकता है।
  5. दिनों के नाम मिलाते समय सूर्योदय-पद्धति जाँचें। दोनों स्रोत उसी भूकेन्द्रीय परिवर्तन को बताते हुए भी कैलेंडर में अलग दिन दे सकते हैं।

27 नामों का मानचित्र क्षेत्रों का क्रम देता है; पंचांग परिचय कैलेंडर के बाकी चार अंग समझाता है। तिथि-विशिष्ट तत्काल परिणाम के लिए अलग वैदिक पंचांग गणक उसकी दिखती सेटिंग के साथ लें।

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स्रोत और गणना संबंधी टिप्पणियाँ

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