देखें कि निरयण D1 कुंडली में प्रत्येक पारंपरिक ग्रह कहाँ पूर्ण दृष्टि डालता है। परिणाम में हर दृष्ट राशि और भाव, लक्ष्य राशियों में मौजूद ग्रह और प्रत्येक राशि को मिलने वाली दृष्टियाँ दी जाती हैं।
यह गणक क्या गिनता है?
सातों ग्रहों की पूर्ण सप्तम दृष्टि होती है। मंगल पूर्ण चतुर्थ और अष्टम दृष्टि भी डालता है, बृहस्पति पूर्ण पंचम और नवम तथा शनि पूर्ण तृतीय और दशम दृष्टि। बृहत्पाराशर होराशास्त्र के अध्याय 26, श्लोक 2–5 (PDF पृष्ठ 37) में राशियाँ गिनने के ये नियम दिए हैं। ग्रह की अपनी राशि को स्थान 1 माना जाता है। गणक केवल ये पूर्ण दृष्टियाँ दिखाता है; इससे यह आशय नहीं कि कोई दृष्टि अपने आप में शुभ है या भविष्यवाणी करती है।
किसी दूसरे उपकरण के परिणामों से तुलना करने से पहले गिनती का हल किया हुआ उदाहरण और विधि की सीमाएँ देखें।
