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संबंधों की कुंडली पढ़ने की मार्गदर्शिका

सिनैस्ट्री या संयुक्त कुंडली: किसका उपयोग करें?

एक सजावटी खगोलीय वलय, चंद्रमा का चक्र और अध्ययन की एक बंद पुस्तक।

दो जुड़ी हुई विधियाँ अलग प्रश्नों के उत्तर देती हैं। पहले वह विधि चुनें जो आपके उपलब्ध विवरण और पूछे जाने वाले प्रश्न के अनुकूल हो।

एक व्यक्ति की कुंडली का कौन-सा बिंदु दूसरे की कुंडली के किस बिंदु से जुड़ता है, यह जानने के लिए सिनैस्ट्री चुनें। दोनों समूहों की स्थितियों से निकाली गई एक प्रतीकात्मक कुंडली चाहिए, तो मध्यबिंदु संयुक्त विधि चुनें। अंतर व्याख्या से पहले गणना में शुरू होता है।

प्रश्नसिनैस्ट्रीमध्यबिंदु संयुक्त कुंडली
चित्र में क्या बनता है?दो अलग जन्मकुंडलियाँ और उनके बीच ग्रह-संपर्क।समकक्ष ग्रहों के मध्यबिंदुओं का निकाला गया एक समूह।
क्या मैं बता सकता हूँ कि ग्रह किस व्यक्ति का है?हाँ। हर बिंदु अपनी मूल कुंडली के व्यक्ति से जुड़ा रहता है।नहीं। हर मध्यबिंदु में दोनों जन्मकुंडलियों का योगदान है।
जन्म का समय अज्ञात है?ग्रहों की कई तुलनाएँ फिर भी संभव हैं; चंद्रमा और मुख्य कोणों में सावधानी चाहिए।सीमाएँ ध्यान में रखकर ग्रहों के मध्यबिंदु देखे जा सकते हैं; मुख्य कोणों और भावों के लिए विश्वसनीय समय चाहिए।
ग्रह-संबंध किन बिंदुओं को जोड़ता है?हर जन्मकुंडली का एक-एक बिंदु।संयुक्त कुंडली के दो निकाले गए बिंदु।

जब कुंडलियाँ अलग बात कहती प्रतीत हों

मान लें कि दोनों जन्मकुंडलियों के बीच शुक्र–मंगल का निकट संपर्क है, जबकि संयुक्त कुंडली में शुक्र और मंगल काफी दूर हैं। इसमें गणितीय विरोध नहीं है: सिनैस्ट्री A के शुक्र की तुलना B के मंगल से करती है; संयुक्त विधि पहले शुक्र और शुक्र तथा मंगल और मंगल का औसत निकालती है, फिर उन नई स्थितियों की तुलना करती है। एक कुंडली से दूसरी की जबरन पुष्टि न करवाएँ।

उलटा भी हो सकता है। संयुक्त कुंडली के दो निकाले गए ग्रह निकट ग्रह-संबंध बना सकते हैं, भले वही ग्रह-जोड़ी एक जन्मकुंडली से दूसरी के बीच ऐसा संपर्क न बनाए। यह निकाली गई रचना की विशेषता है। अर्थ जोड़ने से पहले समझें कि क्या मापा गया है। चौंकाने वाला परिणाम अंशों, अंशगत सीमा और मध्यबिंदु की पद्धति की जाँच करने का कारण है।

एक व्यावहारिक क्रम

  1. हर जन्मकुंडली की तिथि, समय, स्थान और ऐतिहासिक UTC अंतर जाँचें।
  2. दोनों कुंडलियों की तुलना करें और स्पष्ट रखें कि हर ग्रह किस व्यक्ति का है।
  3. ग्रह-संबंधों के संग्रह में कुछ निकट संपर्क पढ़ें। समय अज्ञात हो, तो भावों और सीमा के निकट चंद्र-संपर्कों के दावे रोककर रखें।
  4. संयुक्त कुंडली के साथ दोनों जन्मकुंडलियाँ बनाएँ ताकि स्पष्ट दिखे कि हर मध्यबिंदु किन स्थितियों से निकला।
  5. पूछें कि व्याख्या दोनों व्यक्तियों के संबंध के वर्णन से मेल खाती है या नहीं। मेल न खाए तो उसे छोड़ दें।

डेविसन विधि इसमें कहाँ आती है?

डेविसन कुंडली तीसरी विधि है। यह दोनों जन्म-क्षणों का मध्य समय और भौगोलिक मध्यबिंदु लेती है, फिर उस निकाले गए समय और स्थान पर ग्रहों की गणना करती है। मध्यबिंदु संयुक्त कुंडली इसके बजाय समकक्ष जन्म-देशांतरों का औसत लेती है। दोनों एक कुंडली-चक्र बनाती हैं, लेकिन ग्रह-स्थितियाँ और भावों के चुनाव अलग हो सकते हैं। यही विधि सीखनी हो, तो संबंधों की कुंडली के प्रकारों का परिचय और डेविसन गणक देखें।

कोई भी कुंडली यह परखने का साधन नहीं कि कोई व्यक्ति भरोसेमंद है या संबंध टिकेगा। वास्तविक निर्णय संबंधित व्यक्तियों के हैं।