मूल गरिमा ग्रह और राशि-स्थान का संबंध बताने की ऐतिहासिक भाषा है। Tetrabiblos I.17 में “घर” शब्द ग्रह की अपनी राशि बताता है, जन्म-कुंडली का क्रमांकित भाव नहीं। इस मार्गदर्शिका में स्रोत की एक स्पष्ट पद्धति ली गई है, ताकि पाठक वही खोज दोहरा सके।
कुंडली के अंश से जुड़े पाँच प्रश्न
- स्वराशि: यह किसकी राशि है? सूर्य सिंह, चंद्रमा कर्क, बुध मिथुन और कन्या, शुक्र वृषभ और तुला, मंगल मेष और वृश्चिक, बृहस्पति धनु और मीन तथा शनि मकर और कुंभ का स्वामी है।
- उच्च राशि: टॉलेमी सूर्य को मेष, चंद्रमा को वृषभ, बुध को कन्या, शुक्र को मीन, मंगल को मकर, बृहस्पति को कर्क और शनि को तुला देते हैं। विपरीत राशि पारंपरिक नीच राशि है।
- तत्त्व-त्रिक: राशि को उसके तत्त्व की दूसरी दो राशियों के साथ रखें। टॉलेमी के विवरण में दिन और रात की कुंडलियों के प्रमुख स्वामी अलग हो सकते हैं। दिवा/रात्रि वर्ग चुनने से खोज का केवल यही क्षेत्र बदलता है।
- सीमा या टर्म: हर राशि पाँच असमान हिस्सों में बँटती है, जो सूर्य और चंद्रमा के अतिरिक्त पाँच ग्रहों को दिए जाते हैं। शून्य से शुरू करके राशि के भीतर के अंश से चुनें। सीमा पर नया स्वामी शुरू होता है।
- स्वराशि के विपरीत: ग्रह की अपनी किसी राशि से विपरीत राशि उसकी पारंपरिक प्रतिकूल स्थिति है। किसी ग्रह पर प्रतिकूल या नीच स्थिति का संकेत हो सकता है और फिर भी उस सटीक अंश पर छोटी गरिमा मिल सकती है; श्रेणियाँ अलग दिखाई जाती हैं।
यहाँ लिए गए दिन और रात के तत्त्व-त्रिक स्वामी
| राशियाँ | दिन | रात | अतिरिक्त स्वामी |
|---|---|---|---|
| मेष · सिंह · धनु | सूर्य | बृहस्पति | - |
| वृषभ · कन्या · मकर | शुक्र | चंद्रमा | - |
| मिथुन · तुला · कुंभ | शनि | बुध | - |
| कर्क · वृश्चिक · मीन | शुक्र | चंद्रमा | दोनों में मंगल |
जल की व्यवस्था Tetrabiblos I.18 पर है, जिसमें दिन में शुक्र और रात में चंद्रमा के साथ मंगल का नाम है। दूसरे लेखक जल की अलग व्यवस्था करते हैं। सारणी स्पष्ट पद्धति देती है, सार्वभौमिक नहीं।
राशि और अंश के अनुसार मिस्री सीमाएँ
टॉलेमी I.20 में यह “सामान्यतः स्वीकार की गई” मिस्री सारणी देते हैं, फिर एक दूसरी प्राचीन पांडुलिपि की व्यवस्था पर चर्चा करते हैं। खोज मुद्रित सामान्य सारणी लेती है। हर पंक्ति का योग 30° है और दायाँ किनारा अगले हिस्से का है।
| चिह्न | पहला | दूसरा | तीसरा | चौथा | पाँचवाँ |
|---|---|---|---|---|---|
| मेष | बृहस्पति0°–<6° | शुक्र6°–<12° | बुध12°–<20° | मंगल20°–<25° | शनि25°–<30° |
| वृषभ | शुक्र0°–<8° | बुध8°–<14° | बृहस्पति14°–<22° | शनि22°–<27° | मंगल27°–<30° |
| मिथुन | बुध0°–<6° | बृहस्पति6°–<12° | शुक्र12°–<17° | मंगल17°–<24° | शनि24°–<30° |
| कर्क | मंगल0°–<7° | शुक्र7°–<13° | बुध13°–<19° | बृहस्पति19°–<26° | शनि26°–<30° |
| सिंह | बृहस्पति0°–<6° | शुक्र6°–<11° | शनि11°–<18° | बुध18°–<24° | मंगल24°–<30° |
| कन्या | बुध0°–<7° | शुक्र7°–<17° | बृहस्पति17°–<21° | मंगल21°–<28° | शनि28°–<30° |
| तुला | शनि0°–<6° | बुध6°–<14° | बृहस्पति14°–<21° | शुक्र21°–<28° | मंगल28°–<30° |
| वृश्चिक | मंगल0°–<7° | शुक्र7°–<11° | बुध11°–<19° | बृहस्पति19°–<24° | शनि24°–<30° |
| धनु | बृहस्पति0°–<12° | शुक्र12°–<17° | बुध17°–<21° | शनि21°–<26° | मंगल26°–<30° |
| मकर | बुध0°–<7° | बृहस्पति7°–<14° | शुक्र14°–<22° | शनि22°–<26° | मंगल26°–<30° |
| कुंभ | बुध0°–<7° | शुक्र7°–<13° | बृहस्पति13°–<20° | मंगल20°–<25° | शनि25°–<30° |
| मीन | शुक्र0°–<12° | बृहस्पति12°–<16° | बुध16°–<19° | मंगल19°–<28° | शनि28°–<30° |
उदाहरण: मेष के 6°
मेष स्वराशि से मंगल की और उच्च राशि से सूर्य की है। दिन की कुंडली में उसका प्रमुख तत्त्व-त्रिक स्वामी सूर्य है, रात की कुंडली में बृहस्पति। मेष के 0° से 6° तक, अंतिम अंश को छोड़कर, मिस्री सीमा बृहस्पति की है। ठीक 6° पर शुक्र की सीमा शुरू होती है और 12° तक रहती है। मेष के 6° पर मंगल अपनी राशि में है; वह उस अंश का सीमा-स्वामी नहीं है। गणक में दूसरा अंश जाँचें।
स्रोत और सीमाएँ
जानकारी टॉलेमी की Tetrabiblos की पुस्तक I, अध्याय 17–20 से उतारी गई है और अध्याय 20 की मिस्री सारणी पंक्ति-दर-पंक्ति जाँची गई है। खोज कल्दियाई द्रेष्काण या “फेस” नहीं लेती: I.23 में टॉलेमी का बाद का “अपना फेस” अलग ग्रह-संबंध बताता है। इन अर्थों को एक अंक में मिलाने से स्रोत का अंतर छिप जाएगा। कुंडली का दिवा/रात्रि वर्ग इनपुट है, क्योंकि केवल राशि-देशांतर नहीं बताता कि सूर्य क्षितिज के ऊपर था या नहीं। यह संदर्भ कुंडली का बल, परिणाम, स्वास्थ्य या स्वभाव नहीं आँकता।
पूरी कुंडली के लिए जन्म-कुंडली निकालें और दिवा/रात्रि वर्ग चुनने से पहले अभिलेख का समय तथा स्थानीय क्षितिज जाँचें। भरोसेमंद जन्म-समय न हो तो अनुमान लगाने के बजाय दिन और रात, दोनों के परिणामों की तुलना करें।
