सोयगा की प्रसिद्ध सारणियों का निर्माण व्यवस्थित है। निर्माण का नियम मिलना एक महत्त्वपूर्ण खोज है, लेकिन इसे अनुवाद या उनके अभिप्रेत अनुष्ठानिक उपयोग का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
- सारणियों की संख्या
- 36
- अक्षर-जाल का आकार
- प्रत्येक में 36 × 36 अक्षर
- आधुनिक पुनर्निर्माण
- जिम रीड्स
सारणियों में क्या है
लैटिन ग्रंथ के अंत में छत्तीस वर्गाकार अक्षर-जाल हैं, जिनमें से प्रत्येक में अक्षरों की छत्तीस पंक्तियाँ और छत्तीस स्तंभ हैं। रीड्स बारह-बारह सारणियों के दो क्रम पहचानते हैं जिन पर राशियों के नाम हैं; उनके बाद सात ग्रह-संबंधी शीर्षक, चार तत्त्व-संबंधी शीर्षक और अंत में Magistri नाम की सारणी है। ये शीर्षक ज्योतिषीय भाषा को कृति की संरचना का हिस्सा बनाते हैं। लेकिन अपने आप में वे पाठक को यह नहीं बताते कि किसी अक्षर-पंक्ति का क्या करना है।
शीर्षक यह भी समझाते हैं कि “सोयगा की ज्योतिषीय सारणियाँ” खोजने पर यह विषय क्यों मिलता है। ये श्रेणियाँ ऐतिहासिक शीर्षक हैं, आधुनिक जन्मकुंडली या ग्रह-स्थिति पंचांग नहीं। 36 गुणा 36 का अक्षर-जाल लैटिन अक्षरों से बनी पाठ-सामग्री है। सुरक्षित पांडुलिपियों के अक्षर-जाल अलग-अलग खानों में भिन्न हो सकते हैं, जबकि सजावटी पुनर्निर्माण प्रायः उन अंतरों को मिटा देते हैं।
अक्षर-जाल बनाने का नियम
रीड्स ने पाया कि प्रत्येक सारणी के लिए दिया गया कूट-शब्द अक्षर उत्पन्न करने वाले एक निश्चित नियम का बीज बनता है। उनका विश्लेषण मेष की पहली सारणी से शुरू होता है और दिखाता है कि बार-बार लिखा शब्द तथा उसका उलटा रूप अक्षर-जाल का एक किनारा कैसे बनाते हैं; इसके बाद एक मानचित्रण और चक्रीय अंकगणित आगे के खाने उत्पन्न करते हैं। OEIS में NISRAM बीज से मेष की उस सारणी का प्रलेखित पुनर्निर्माण दर्ज है। यह संगणकीय विवरण आधुनिक विद्वत्तापूर्ण विश्लेषण है; हर पुरानी सारणी के साथ लिखे किसी सुरक्षित निर्देश का पाठ नहीं।
इसे निर्माण-विधि की खोज के रूप में समझना उचित है। यदि एक ही बीज और नियम से वही अक्षर-जाल बनता है, तो अस्तव्यस्त दिखने वाले पृष्ठ एक जाँचने योग्य पैटर्न बन जाते हैं। रीड्स इस पैटर्न से संभावित नकल-त्रुटियाँ भी पहचान सके और पांडुलिपियों की तुलना कर सके। यह एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि है। फिर भी, दोहराकर बनाया जा सकने वाला परिणाम कूट खोलकर मिला स्पष्ट पाठ नहीं होता। लेखक का उद्देश्य, पाठक से अपेक्षित कार्य और अक्षरों के बारे में कोई धर्मवैचारिक दावा अलग प्रश्न बने रहते हैं।
उदाहरण सहित विवेचन: निर्माण का नियम और कूट-पाठ सुलझाना
मेष की पहली सारणी में बाएँ किनारे पर ऊपर से नीचे NISRAM लिखें, फिर MARSIN, और स्तंभ भरने तक यह जोड़ी दोहराएँ। रीड्स तेईस अक्षरों वाली लैटिन वर्णमाला के अक्षरों को संख्यात्मक स्थान देते हैं और ठीक बाईं ओर के अक्षर से आगे खिसकने का मान चुनते हैं। ऊपर बाएँ कोने में n में उसका निर्धारित विस्थापन जोड़ने पर वर्णमाला के चक्रीय क्रम से d मिलता है; फिर d से i, i से z और z से b मिलता है। नियम दोहराने पर दिखने वाला क्रम dizb, dizb बन जाता है। इसलिए पहली पंक्ति की पुनरावृत्ति नियम से उत्पन्न है; वह न यादृच्छिक शोर है, न साधारण अक्षर-प्रतिस्थापन से छिपाया गया कोई वाक्य।
यह गणना इस प्रश्न का उत्तर देती है कि “इस पृष्ठ को फिर कैसे बनाया जा सकता है?” वह यह नहीं बताती कि “पृष्ठ पर कौन-सा वाक्य लिखा है?” नकल किए गए किसी खाने को बदलने पर यह अंतर दिखता है। निर्माण की त्रुटि एक आयताकार क्षेत्र में फैलती है, क्योंकि आगे के खाने अपने ऊपर और बाईं ओर के पड़ोसी खानों पर निर्भर होते हैं; नकलनवीस द्वारा एक खाने में किया गया अक्षर-परिवर्तन प्रायः इस तरह नहीं फैलता। रीड्स ने इस अंतर से पाठ के संचरण को परखा और दोनों पूर्ण पाठ-साक्ष्यों के पीछे एक साझा त्रुटिपूर्ण पूर्वज प्रति का अनुमान लगाया। नियम निर्माण और नकल के इतिहास को उजागर करता है, जबकि अभिप्रेत अनुष्ठानिक अर्थ अनसुलझा रहता है।
पांडुलिपिक पाठ-साक्ष्यों की तुलना
Bodleian MS Bodley 908 और British Library Sloane MS 8 में निकट संबंध वाले अक्षर-जाल मिलते हैं। रीड्स उनके खानों के अंतर की तुलना करते हैं और प्रत्येक की अपनी त्रुटियों के साथ साझा त्रुटियाँ भी पाते हैं। उनके प्रस्तावित वंश-वृक्ष में दोनों सुरक्षित पुस्तकें एक पुरानी त्रुटिपूर्ण मध्यवर्ती प्रति से निकलती हैं, न कि एक केवल दूसरी की नकल है। यह त्रुटियों के पैटर्न से निकला अनुमान है, किसी खोई हुई पूर्वज प्रति की तस्वीर नहीं।
सोयगा की आठ सारणियाँ डी की पांडुलिपि Sloane MS 3189 में भी हैं, जिसे एनोक की पुस्तक या Liber Loagaeth कहते हैं। रीड्स के अनुसार ये सोयगा की सारणियों की नकल हैं, केवल उनकी आकृति से प्रेरित नए अक्षर-जाल नहीं। उनकी मौजूदगी दोनों पाठों के बीच संपर्क का ठोस बिंदु देती है। उनके आसपास की लोआगेथ पांडुलिपि अपनी अलग संरचना और इतिहास वाला पृथक पाठ-साक्ष्य बनी रहती है। उसके सभी अक्षर-जालों को “सोयगा की पुस्तक” या सोयगा के सभी अक्षर-जालों को “एनोकियन पट्टिकाएँ” कहना उस साक्ष्य को मिटा देता है जो इस तुलना को उपयोगी बनाता है।
सोयगा एक लैटिन ग्रंथ है; डी की देवदूत-संबंधी डायरियाँ और Liber Loagaeth अलग पांडुलिपियाँ हैं। किसी सारणी की नकल संपर्क का प्रमाण है, दोनों के एक ही कृति होने का नहीं।
स्रोत और अभिलेख
- जिम रीड्स, “John Dee and the Magic Tables in the Book of Soyga”, प्रकाशक के यहाँ अध्याय का अभिलेख ↗
- जिम रीड्स, लेखक का लेख-पाठ और सारणियों का विश्लेषण ↗
- OEIS A346223, सोयगा की पहली सारणी का प्रलेखित पुनर्निर्माण ↗
- ब्रिटिश लाइब्रेरी की सूची, Sloane MS 3189, डी की एनोक की पुस्तक / Liber Loagaeth ↗
- रॉबर्ट्स और वॉटसन, जॉन डी के पुस्तकालय की सूची का परिशिष्ट, प्रविष्टि DM166 (Bibliographical Society) ↗
